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alopecia areata treatment in Hindi | एलोपेसिया ठीक ना होनेंपर पैसे वापसी की गारंटी |

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alopecia areata treatment in Hindi इन्द्रलुप्त यानी एलोपेसिया का 100% गारंटी सुधा चिकित्सा ना होने पर पैसे वापस करने वाले नविन वैद्य safi ji निवासी ग्रेटर नोएडा यूपी के इस दमदार वायदे से प्रभावित Ayushyogi ने इस पोस्ट को पब्लिक किया है। वैसे वैद्य सैफी जी से इस दवाई को प्राप्त करके alopecia areata में सफलता पाने वाले कुछ पेशेंट से मेने बात किया हूं उनकी संतुष्टि पूर्ण शब्दों ने ही मुझे यह पोस्ट लिखने के लिए प्रेरित किया है।

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It is good only if alopecia is treated with Ayurveda.  If you want success in Ayurvedic medicine then you should also study Ayurveda.

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एलोपेसिया (alopecia areata) इंद्रलुप्त क्या है?
What is alopecia areata in Hindi? 

Alopecia areata को आयुर्वेद में इंद्रलुप्त के नाम से जाना जाता है। आज हम एलोपेसिया को हमेशा के लिए ठीक करने हेतु चर्चा करेंगे। इस पोस्ट में चरक संहिता सूत्र स्थान पंचम अध्याय मात्राशीतीयोध्याय के संदर्भ स्वरूप बात करेंगे ताकि आपको मनगढ़ंत कहानी जैसा ना लगे बस ग्रंथ के उस बात को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में कुछ विमर्श जरूर करेंगे।
जैसे कि आप सभी लोग जानते हैं आयुर्वेद व्याधि उत्पन्न होने से पहले रोग उत्पादक कारणों को ढूंढने के लिए निर्देश देता है। यदि आप एलोपेसिया alopecia areata जीने आयुर्वेद में इंद्रलुप्त के नाम से जाना जाता है को हमेशा के लिए ठीक करना चाहते हैं तो आयुर्वेदिक ग्रंथों में वर्णित एलोपेसिया alopecia areata उत्पन्न करने वाले इन कारणों के ऊपर विचार करना होगा और नित्य अभ्यास स्वरूप उन कारणों को त्यागने का प्रयत्न करना होगा।

alopecia areata treatment in Hindi | इन्द्रलुप्त यानी एलोपेसिया का 100% गारंटी सुधा चिकित्सा एलोपेसिया (alopecia areata) इंद्रलुप्त क्या है? What is alopecia areata in Hindi

आयुर्वेद और एलोपेसिया alopecia areata।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में एलोपेसिया alopecia areata को इंद्रलुप्त इस नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में एलोपेसिया alopecia areata उत्पन्न होने के लिए निम्न शारीरिक आधार को स्वीकार किया है।

त्वचा-स्पर्श इंद्रिय का प्रतिनिधित्व स्थान।
सिर - प्रधान इंद्रिय का प्रतिनिधित्व करने वाला स्थान।
हाथ और पैर-  कर्मेंद्रिय को प्रतिनिधित्व करने वाला अंग
मन - उभय इन्द्रियों को प्रतिनिधित्व करता है।

एलोपेसिया alopecia areata होने के लिए इन चार शरीर भावों का पवित्र होना जरूरी है यानी आरोग्य होना जरूरी है। यदि इनमें से कोई एक दो या अधिक शरीरभाव आपके आहार-विहार से प्रकुपित हो जाता है तो यह आपके  alopecia areata का कारण हो सकता है।
आयुर्वेद में बाल जल्दी सफेद हो जाना, बालका जल्दी गिर जाना, या एलोपेसिया होने के पीछे निम्न सूत्र के बारे में चर्चा किया गया है आप भी इन रोगों में इस तरह से व्यवस्था पत्र बना लीजिए।
इंद्रालुप्त,खालीत्य,पालीत्य होने के लिए दोषों में कफ पित्त और वात तीनों ही दोष हेतु होते हैं धातु में अस्थि धातु के ऊपर विचार करना चाहिए मल में अस्थि मल, अग्नि में अस्थि अग्नि तथा जठराग्नि और हेतु में विधि पालन रहित विपरीत आचरण के विषय में रोगीसे प्रश्न करना चाहिए।

 

एलोपेसिया (alopecia areata) क्यों होता है?

एलोपेसिया को यदि हम आधुनिक चिकित्सा सिद्धांत के हिसाब से समझने के लिए जाएंगे तो उसमें कन्फ्यूजन ज्यादा दिखाई देगा और एलोपेसिया चिकित्सा विधि भी अधिक महंगा और कष्ट साध्य है मगर इस विषय में देखिए आयुर्वेदिक ग्रंथकार क्या कहते हैं।
एलोपेसिया ( इंद्रालुप्त) के लिए सूत्र देते हुए ग्रंथकार इस शब्द को लिखते हैं।

एलोपेसिया (alopecia areata) में बाल झड़ने का मुख्य कारण।

alopecia areata नामक इस रोग में सिरके एक छोटे हिस्से में गोलाकार होकर बाल गिर जाते हैं इसके वारेमें आयुर्वेद में स्पष्ट वर्णन किया है।


-रोमकूपानुगं पित्तं वातेन सह मूच्छितम् 
प्रच्यावयति रोमाणि ततः श्लेष्मा सशोबितः ॥३३॥


 इन्द्रलुप्त alopecia areata - रोमकूपों में पहुंच पित्त वायु के साथ मूच्छित (दूषित) होकर, रोमों को गिरा देता है। इसके अनन्तर कफ रक्त से मिलकर रोमकूपों को रोक लेता है।

 यदि रोमकूपांस्तु ततोऽन्येषामसंभवः 
तदिन्द्रलुप्तं खालित्यं राज्येति च विभाव्यते।


 इसलिये दूसरे नये रोमकूप उत्पन्न नहीं होते। इस रोग को इन्द्रलुप्त खालित्य या 'रुह्या' कहते हैं।(इन्द्रलुप्त ) श्मश्रु और शिर में होता है, खालित्य शिर में और रुह्या सारे शरीर में होती है।

एलोपेसिया ( इंद्रलुप्त ) पर मेरा खुद का सफल अनुभव।

वैसे आज तक मैंने alopecia areata के ऊपर ज्यादा काम तो नहीं किया है इसका कारण मेरे पास इसके रोगी नहीं आते है । मेरा खुद का alopecia areata जिसको हम बाल में कीड़े लग जाना, दाढ़ी में कीड़े लग जाना, सिर के बाल झड़ जाना आदि कहकर संबोधन करते हैं के ऊपर प्रयोग करने से काफी अच्छा फायदा मिलता है।

मञ्जिष्ठा, सारिवा, निम्ब, करञ्ज, हरिद्रा, दारुहरिद्रा, कण्टकारी, मधुयष्टी, गुडूची, मरिच इन सभी ताजा जड़ी-बूटी द्रव्यों का कलेक्शन करें और समान मात्रा में दर्दरा कुटकर 16 गुना पानी डालें और चौथाई गुना अवशेष रहे तब तक उबालते रहे उसके बाद गरमा गरम कपड़े से छानकर इसमें सरसों का तेल काढ़ा के चौथाई मात्रा में डालकर दोबारा पकाना शुरू करें । उबलते हुए जव अकेला तेल वचे तो छानकर सुरक्षित  रखें। यह तेल नित्य alopecia areata से विकृत स्थान पर मसाज करना है। यह तेल उससे स्थानिक जगह में स्नेह कर्म करने के लिए उत्तम है।

alopecia areata का आयुर्वेदिक इलाज।

ऊपर वर्णित तेल से सर्वप्रथम मसाज करने के बाद अब लाल गुंजा के पाउडर से मसाज करें। किसको क्रमशः ही करना है यानी एलोपेसिया ( alopecia areata ) संक्रमित स्थान में सर्वप्रथम उस तेल से मसाज करें फिर गुंजा के पाउडर से मसाज करें किसको आयुर्वेद के भाषा में उद्वर्तन क्रिया बोलते हैं।


उद्वर्तन हो जाने के बाद अब उस जगह में जलौकावचारण करना है। यानी कि जोंक नाम का जो कीड़ा है उससे एलोपेसिया संक्रमित स्थान में लगाकर खून चूसाना है।
इसके बाद क्रमश कि उस एलोपेसिया संक्रमित स्थान पर निम्न मसी कल्पना का प्रयोग करना है।


१. ग्रंथ में एलोपेसिया नाशक मसी के रूप में सर्वप्रथम मदनमसी का प्रयोग करने के लिए बोला है। मदन फल मसी निर्माण विधि द्वारा मसी बनाकर एलोपेसिया संक्रमित स्थान में बताएं विधि अनुरूप क्रमशः इस लेप को लगाने से रोगी को बहुत जल्द आराम मिलता है।


आयुर्वेदिक ग्रंथ में वरामसी,मयुरपीच्छ मसी, के बारे में भी वर्णन आया है। इनमें से कोई भी मशीन जो उपलब्ध हो उसका प्रयोग आप कर सकते हैं।

इस फोटो में जिस तरह से सिर में बाल उड़ा हुआ दिख रहा है बस इसी का नाम इन्द्रलुप्त या एलोपेसिया है। इस पोस्ट में हम इस रोग के ऊपर बात कररहे है।

Alopecia kise kahate Hain इस फोटो में जिस तरह से सिर में बाल उड़ा हुआ दिख रहा है बस इसी का नाम इन्द्रलुप्त या एलोपेसिया कहा जाता है। इस पोस्ट में हम इस रोग के ऊपर बात कररहे है।

alopecia areata (इंद्रलुप्त) 100% सफल सामान्य आयुर्वेदिक उपचार।

यदि आयुर्वेदिक ग्रंथ में बताएं विधि द्वारा नियमों का पालन करते हुए दोषों के अनुरूप चिकित्सा व्यवस्था व्यवस्थित किया जाए तो ऐसा कौन सा रोग है जिसके ऊपर हम पार नहीं पा सकते हैं या नहीं सभी रोग समूल नष्ट किया जा सकता है।
 इसी के संदर्भ में आज हम विधि पूर्वक alopecia areata के ऊपर चिकित्सा विधि को व्यवस्थित करने के लिए बात कर रहे हैं तो वह कौन-कौन से मर्यादा है जिस का उल्लंघन alopecia areata होने पर नहीं करना चाहिए ।
यानी वह कौन-कौन से दिनचर्या है है जिसके ऊपर हमें फोकस करनी चाहिए। एक बात और यहां वर्णित दिनचर्या का पालन करने पर एलोपेसिया ही नहीं बल्कि किसी भी प्रकार के चर्म विकार शरीर में कभी हो नहीं सकता।


आपको अपना नित्य दिनचर्या इस तरह निश्चित करना चाहिए।

- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर एक कप गर्म पानी पीना चाहिए यहां ध्यान रखने वाली बस यही है कि 6:00 बजे के बाद कफ का समय रहता है उस समय यदि रोगी को मंदाग्नि या अपच की शिकायत है तो इस बीच में पानी नहीं पीना चाहिए।
ब्रह्म मुहूर्त में गर्म पानी पीने से अन्नवह स्रोतस की शुद्धिकरण हो जाती है शरीर के दोष शांत होते हैं।

- शौच का बैग कभी रोकना नहीं चाहिए लैट्रिन आने पर भी यदि आप उसको रोक कर बैठते हैं तो इसके वजह से पिंडलियों में दर्द,साइनस, सिर में दर्द, पेट में गुड गुड करके आवाज आना आदि समस्या होता है।
-दंत धावन-नित्य उठने पर दांत की सुरक्षा हेतु उसकी सफाई करना जरूरी है नेत्र सिर और कर्ण हृदय मुख में यदि रोग हो तो लकड़ियों से दंत धावन नहीं करनी चाहिए।

-नश्य गण्डुष-यदि आपको खालित्य पालित्य या एलोपेसिया है तो आपको समय-समय पर अपने नाक में अणु तेल और सड़ बिंदु तेल लगाना चाहिए। लगाने की विधि यह है प्रथम 2 दिन और तेल और तीसरे दिन सर बिंदु इसी क्रम से 21 दीन तक करते रहे।
नश्य कर्म से मस्तिष्क और नेत्र की सफाई हो जाती है।


धूम्र सेवन-एलोपेसिया या किसी प्रकार के शिरो रोग से निजात पाने के लिए नाक से या मुंह से धूम्र सेवन भी आयुर्वेदिक विधि से कर लेनी चाहिए। यहां धूम्र सेवन के लिए आप तालीसपत्र तेजपत्ता तथा कुटकी,वच के टुकड़ा को जलाकर उसके धुंए को सुंघ सकते हैं।


अभ्यंग-मसाज करने को अभ्यंग कहा जाता है। आप नित्य स्नान से पहले नीम के पत्ते ,आम के छाल, लोध्र, अरहर के छाल, अनार के छाल इनके कपड़े छान पाउडर बनाकर शरीर में अच्छी विधि से मसल कर फिर सरसों या तिल के तेल से मसाज करें फिर सिरको ठंडा पानी और धड़ से नीचे गर्म पानी से नहाए।
आंख में अंजन लगाने से भी सिर के बाल में काफी सुधार आता है।

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