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Agastya Tree:अगस्त्य Sesbania grandiflora के असली पहचान और आयुर्वेदिक गुणधर्मः।

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अगस्ति या अगस्त्य (वैज्ञानिक नाम: Sesbania grandiflora एक तेज़ी से उगने वाला वृक्ष है।Agastya tree ३ से ७ मीटर लम्बा और मुलायम लकड़ी का बना होता है। इसके फल लम्बी व चपटी फलियों जैसे होते हैं। Agastya tree के फूल लाल या सफ़ेद रंग का होता है। यह मूल रूप से मलेशिया से उत्तर ऑस्ट्रेलिया के क्षेत्र का निवासी है। लेकिन अब भारत और श्रीलंका में भी उगाया जाता है।Agastya tree की छाल, फूल और जड़ को आयुर्वेद और कई अन्य पारम्परिक चिकित्सा प्रणालियों में रोग-निवारण के लिये प्रयोग में लाया जाता है।

रासायनिक संघटन

अगस्त्य पेड़ में पोषक तत्व (Agastya Tree Nutrients)

- आयरन (Iron)

- विटामिन ए, बी और सी (Vitamin A, B and C)

- प्रोटीन (Protein)

- कैल्शियम (Calcium)

- कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate)

अगस्त छाल में टैनिन और रक्तवर्ण का निर्यास होता है। पत्तियों में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा तथा विटामिन ए, बी, सी, पुष्प में विटामिन बी सी तथा प्रोटीन, बीजों में लगभग 70 प्रतिशत प्रोटीन तथा एक तेल पाया जाता है।

अगस्त्य का आयुर्वेदिक गुण-धर्म.

अगस्त कटु, तिक्त, किंचित उष्ण, विपाक में मधुर, गुरु तथा कृमि कफ, कण्डू, रक्त पित्त, विष तथा प्रतिश्याय को दूर करने वाला है।

अगस्त का फूल पित्त, कफ तथा चातुर्थिक ज्वरनाशक, शीतल, रुक्ष, तिक्त, वातकर तथा प्रतिश्याय का निवारण करने वाला है। अगस्त का फल  विपाक में मधुर, तिक्त लघु, सर, दस्तावर, रुचिकारक, बुद्धिदायक, स्मरणशक्ति वर्धक तथा त्रिदोष शूल, पाण्डु, विष, शोथ और गुल्म-नाशक है। पका फली रुक्ष और पित्तकारक होती है। इसकी छाल संकोचक, कटुपोष्टिक, पाचक और शक्ति-वर्धक है।

अगस्त्य का औषधीय प्रयोग.

अगस्त के फूल और पत्तियाँ हृदय और यकृत को सुरक्षा प्रदान करने वाला एक विश्वास योग्य आयुर्वेदिक दवाई है।

अगस्त्य  के जड़ मे है कैंसररोधी गुण।

मान्यता है कि अगस्त्य नामक इस वनस्पति के जड़ को कुटकर पानी में मिलाकर रोगी को पिलाने से कैंसर रोग में लाभ मिलता है।

, अगस्त्य का पत्ता शोथरोधी गुणों से परिपूर्ण है।

अगस्त्य के पत्ते में सूजन को नष्ट करने वाली विशेष गुण पाया जाता है पहाड़ में रहने वाले वैद्य लोग इसी अगस्त के पत्ते में हल्दी मिलाकर लेप तैयार करके जहां सूजन होता है उसके ऊपर लगाते हैं।

, इसके अलावा यह कृमिरोधी, जीवाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, दर्दनाशक, ज्वारनाशक, रेचक भी हैं। ये रतौंधी, नजला, साइनस, पित्तदोष, गठिया, खाँसी, सिर दर्द, बुख़ार के इलाज में सहायक हैं। पत्तियाँ एंटीबायोटिक, आक्षेपरोधी (एंटीकन्वल्ज़ेंट), कफ़नाशक, ट्यूमररोधी, अल्सररोधी, मूत्र को बढ़ाने वाली होती हैं। इसका उपयोग शरीर के लिए टॉनिक का काम करता है। ये अतिरज (मेनरेजीअ), अल्सरेटिव कोलाइटिस, नकसीर, श्वसन संबंधी बीमारियों, मिर्गी, कुष्ठ रोग, गुर्दे की पथरी के इलाज में भी लाभकारी मानी गई हैं। फूल स्निग्धकारी, घावपूरक, भी होता है। ये पेटदर्द, राइनाइटिस (नाक के अंदर झिल्ली में सूजन) ल्यूकोरिया,और सभी प्रकार की यकृत और प्लीहा संबंधी बीमारियों के इलाज में भी लाभकारी माना गया है। यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में भी सहायक है।

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